नट समुदाय भारत की एक विशिष्ट विमुक्त और घुमंतू जनजाति है,
जिसकी पहचान उनकी अद्भुत कला और जीवंत संस्कृति से होती है।
मूलतः संस्कृत के ‘नृत्’ या ‘नट’ शब्द से उपजे इस समुदाय का
अर्थ ही ‘अभिनय’ या ‘नृत्य’ करना है।
इनकी जड़ें मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात से जुड़ी हैं,
लेकिन समय के साथ प्रव्रजन के कारण आज ये मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़
आदि राज्यों में भी रचे-बसे हैं।
छत्तीसगढ़ में नट समुदाय को ‘डंग चंगहा’ कहा जाता है,
जिसका अर्थ है ‘रस्सी पर चढ़ने वाला’।
यहाँ यह समुदाय अपनी भौगोलिक पृष्ठभूमि के आधार पर
तीन श्रेणियों—खानदेशियां (लाहौर/खानदेश),
दिलोवान (दिल्ली) और दे (मालवा)—
है।
मध्य प्रदेश में भी नट समुदाय एक विमुक्त जाति के रूप में निवासरत है,
जिन्हें मुख्य रूप से ‘बृजवासी’ और
‘बजानिया’कहा जाता है।
‘बजानिया नट’ की पाँच विशिष्ट उपशाखाएँ
उनकी सामाजिक विविधता को दर्शाती हैं।
ऐतिहासिक रूप से नट समुदाय राजा-महाराजाओं के दरबारों में
अपनी कला का प्रदर्शन करता था।
मनोरंजन के गुप्तचरी का काम भी करते थे।
आपसी सम्प्रेषण तथा सूचनाओं को गुप्त रखने के लिए
इन्होंने एक कूट भाषा विकसित की,
जिसे ‘बदनिया पारसी’ कहा जाता है।
इस भाषा पर राजस्थानी, गुजराती, सिंधी और उर्दू
का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
रस्सी पर चलना, कठपुतली नचाना, बहरूपिया बनना और बाजीगरी दिखाना
नट समुदाय की पारंपरिक आजीविका रही है।
वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग स्थायी निवास की ओर बढ़ रहे हैं
और अपनी कला को आधुनिक स्वरूप में ढाल रहे हैं।
यह त्रिभाषीय टॉकिंग डिक्शनरी
नट समुदाय की अनूठी सांस्कृतिक विरासत और भाषा को संरक्षित करने का
एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस कोश में पारसी शब्दों के
हिंदी और अंग्रेजी अर्थ दिए गए हैं,
साथ ही International Phonetic Alphabet (IPA)
के माध्यम से उनके सटीक उच्चारण का दस्तावेजीकरण किया गया है।
इस डिजिटल शब्दकोश में कुल
1442 शब्द,
323 वाक्य तथा
19 छायाचित्र संकलित हैं।
इसमें नट समाज की दैनिक जीवनशैली,
संस्कारों से जुड़ी शब्दावली
तथा समुदाय के वक्ताओं द्वारा प्रमाणित उच्चारण भी उपलब्ध हैं।
निर्देशन एवं सहयोग
दिशा-निर्देशन: डॉ. कविता रस्तोगी, लखनऊ
भाषा विशेषज्ञ: श्री अजीत कुमार चौधरी, अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश
अध्येता:
- सुश्री नीलिमा गुर्जर, भोपाल, मध्य प्रदेश
- सुश्री स्वाति आनंद, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- डॉ. कमला नरवरिया, भिंड, मध्य प्रदेश
- श्री आशुतोष मालवीय, बलौदा, छत्तीसगढ़
सूचक
- श्री ध्रुव सिंह नट, कजलीखेड़ा, भोपाल
- श्री पवन सिंह नट, कजलीखेड़ा, भोपाल
- श्रीमती प्रतिभा नट, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- श्री सुरेश नट, मुंगेली, छत्तीसगढ़
- श्री सियाराम नट, भिंड, मध्य प्रदेश
- श्री राकेश नट, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- श्रीमती सूरज बाई नट, बिलासपुर, छत्तीसगढ़