कंजर समुदाय एक घुमंतू समुदाय है जिसे कंजरा, कंजड़ इत्यादि नाम से भी जाना जाता है।
भारत में इनका निवास क्षेत्र मुख्यतः उत्तर भारत और मध्य भारत में माना जाता है।
वर्तमान समय में ये मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली सहित कई प्रदेशों में निवासरत हैं।
मध्य प्रदेश में इन्हें अनुसूचित जाति की श्रेणी का दर्जा दिया गया है।
ये अपनी लोक कलाओं जैसे चकरी नृत्य और औषधीय ज्ञान परंपरा के लिए जाने जाते हैं।
कंजर समुदाय की भाषा “कंजरी” कहलाती है।
कंजरी को कंगार भट्ट, या "जिप्सी भाषा" के रूप में भी जाना जाता है।
यह एक इंडो-आर्यन भाषा है, जिसे यूनेस्को ने
लुप्तप्राय भाषा के रूप में वर्गीकृत किया है।
कंजरी का ISO कोड 639-2 है।
प्रस्तुत डिक्शनरी एक टॉकिंग डिक्शनरी है, जिसमें कंजर समुदाय के वक्ताओं द्वारा
कंजरी शब्दों का प्रामाणिक उच्चारण उपलब्ध कराया गया है।
यह एक त्रिभाषीय शब्दकोश है, जिसमें “कंजरी” शब्दों के साथ
उनके हिन्दी और अंग्रेज़ी अर्थ दिए गए हैं।
इसके साथ-साथ “कंजरी” शब्दों का IPA के माध्यम से भाषिक प्रलेखन भी किया गया है।
प्रस्तुत टॉकिंग डिक्शनरी में कुल 1169 शब्द,
23 वाक्य-प्रयोग तथा 29 छायाचित्र संकलित हैं।
इसमें कंजर समाज के दैनिक जीवन-प्रणाली, रीति-रिवाज,
संस्कार तथा आजीविका से संबंधित शब्दावली को भी सम्मिलित किया गया है।
दिशा निर्देशन: डॉ. कविता रस्तोगी, लखनऊ
भाषा विशेषज्ञ: अद्वितीय वर्मा, लखनऊ
अध्येता:
- डॉ. करन सिंह
- डॉ. अक्षय कुमार जैन
सूचक:
- कोमल सिंह नानावत – मोहना, ग्वालियर
- बद्री कंजर – भितरवार, ग्वालियर
- बडडीबाई कंजर – भितरवार, ग्वालियर
- प्रमोद कंजर – दतिया
- खलको चकरावत – दतिया
- नीतेश कंजर – मोहनपुर, ग्वालियर
- बंटी कंजर – गुंजार, ग्वालियर
- भोपसिंह कंजर (पटेल) – पिछोर, ग्वालियर
- विमला कंजर – संतनबाड़ा, शिवपुरी
- बलवंत कंजर – चाचौड़ा, गुना
- सरनाम कंजर – मुरैना
- श्याम कंजर – पिछोर
- भूरा कंजर – पिछोर
- कोकिला कंजर – पिछोर
- चैनू कंजर – पिछोर
- रानी कंजर – सिलपुरा
- सुदीप कंजर – मायापुर
- शिवधर कंजर – मायापुर
- अशोक केजर – सिलपुरा