बांछड़ा मध्यप्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में निवास करने वाला एक घुमंतू समुदाय है।
इस समाज की एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जो इसके रीति-रिवाजों, परंपराओं तथा जीवनशैली में
स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
जनश्रुतियों के अनुसार, पूर्वकाल में राजा-महाराजा इस समुदाय को अपनी सीमाओं के भीतर बसाते थे
और उनसे गुप्तचर का कार्य लेते थे।
समय के साथ आए परिवर्तनों के कारण
बांछड़ा समाज का जीवन कठिन होता चला गया।
आज कृषि, व्यापार तथा अन्य श्रम-आधारित कार्य इनके प्रमुख आजीविका साधन बन गए हैं।
बांछड़ा समाज की भाषा को ‘पारसी’ अथवा ‘भांतू’ भाषा के नाम से भी जाना जाता है।
यह समुदाय आपसी संवाद में अपनी भाषा का प्रयोग करता है, जबकि अन्य समुदायों से संपर्क के समय
संबंधित क्षेत्र की प्रचलित भाषा का उपयोग करता है तथा अपनी भाषा को प्रायः गोपनीय बनाए रखता है।
यह समाज मूलतः राजस्थान से प्रवासित माना जाता है, जिसके कारण इसकी भाषा में
राजस्थानी शब्दावली की पर्याप्त बहुलता पाई जाती है।
मालवा क्षेत्र में दीर्घकालीन निवास के परिणामस्वरूप बांछड़ा भाषा पर मालवी का प्रभाव
भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
इस भाषा की एक महत्वपूर्ण विशेषता, जो इसे शुद्ध मालवी से भिन्न बनाती है,
मराठी भाषा में प्रयुक्त वर्ण ‘ळ’ का प्रयोग है,
जो बांछड़ा भाषा में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
प्रस्तुत टॉकिंग डिक्शनरी एक त्रिभाषीय शब्दकोश है,
जिसमें बांछड़ा (पारसी) भाषा के शब्दों को हिंदी और अंग्रेज़ी अर्थों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इसके साथ ही, शब्दों को देवनागरी, रोमन तथा IPA लिप्यंतरण में दर्ज कर
भाषिक प्रलेखन का प्रयास किया गया है।
इस टॉकिंग डिक्शनरी में बांछड़ा समुदाय के वक्ताओं द्वारा शब्दों का प्रामाणिक उच्चारण
उपलब्ध कराया गया है।
काफी प्रयासों के पश्चात कुछ शब्दों के वाक्य-प्रयोग भी संकलित किए जा सके हैं,
जिनके माध्यम से भाषा के व्यावहारिक प्रयोग को समझा जा सकता है।
प्रस्तुत टॉकिंग डिक्शनरी में कुल 1284 शब्द तथा
41 वाक्य-प्रयोग सम्मिलित हैं।
इसमें बांछड़ा समाज की दैनिक जीवन-प्रणाली, सामाजिक व्यवहार तथा आजीविका से संबंधित
शब्दावली को भी शामिल किया गया है।
निर्देशन एवं सहयोग
दिशा-निर्देशन: डॉ. कविता रस्तोगी, लखनऊ
भाषा विशेषज्ञ: श्री सैयद मुर्तुज़ा हुसैन, लखनऊ
अध्येता:
- डॉ. सत्या सोनी, सागर
- डॉ. सौरभ गुर्जर, रतलाम
- डॉ. ललिता लोधा, मंदसौर
- डॉ. दीपिका रायकवार, सीतामऊ
सूचक
- श्री लोकेश चौहान – मोरखेड़ा, मंदसौर
- श्री मंगल चौहान – जावरा, मंदसौर
- श्री वीरेंद्र चौहान – ढोढर, रतलाम
- श्री सुरेश चौहान – ढोढर, रतलाम
- श्री वासुदेव धनगर – पानपुर, मंदसौर
- श्रीमती आँचल धनगर – पानपुर, मंदसौर
- श्री दीपक धनगर – पानपुर, मंदसौर
- श्रीमती सपना चौहान – निर्धारी, मंदसौर
- सुश्री नंदनी चौहान – निर्धारी, मंदसौर
- श्री बंटी दारिमा – डोडिया मीणा, मंदसौर
- श्री राहुल चौहान – चिरमौलिया, मंदसौर